सीरिया में शांति की उम्मीद

प्रकाश के रे बरगद के संपादक हैं.

बीते पांच सालों से जारी सीरिया का गृह युद्ध आज एक खास मुकाम पर है. इस महीने के आखिर में कजाखिस्तान के अस्ताना में सीरियाई सरकार और विद्रोहियों के बीच बातचीत की संभावना बन रही है. इस शांति वार्ता की मध्यस्थता रूस और तुर्की कर रहे हैं. रूस ने इस संघर्ष में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद का साथ दिया है, पर बातचीत के लिए उपयुक्त माहौल बनाने के लिए उसने अपने सैनिकों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है. रूसी नौसैनिक पोत एडमिरल कुज्नेत्सोव संघर्ष क्षेत्र से विदाई से इस प्रक्रिया की शुरुआत हुई है. अलेप्पो में विद्रोहियों की हार के बाद हुए युद्ध-विराम समझौते के तहत ये सारी पहलें हो रही हैं. इस समझौते में इसलामिक स्टेट तथा अल-कायदा समर्थित अल-नुसरा और उसके सहयोगी संगठन शामिल नहीं हैं.

दिसंबर के आखिरी दिनों में अलेप्पो में जीत के बाद राष्ट्रपति बशर अल-असद बीते पांच सालों में पहली बार कुछ निश्चिंत नजर आ रहे हैं. एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने कहा है कि वे शांति वार्ता में हर मुद्दे पर विचार करने के लिए तैयार हैं. असद का आत्मविश्वास उनकी इस बात से भी झलकता है कि यदि सीरियाई जनता उन्हें सत्ता में नहीं देखना चाहती है, तो वे पद छोड़ने के लिए भी तैयार हैं.

पर वास्तविक स्थिति जटिल भी है. जैसा कि एसोसिएटेड प्रेस के फिलिप इसा ने लिखा है, अलेप्पो की जीत किसी और माहौल में असद के अपराजेय होने का संकेत हो सकता था क्योंकि वे इतने सालों से जारी विद्रोह के सामने डटे हुए हैं. लेकिन हाल के समय में रूस, ईरान और तुर्की के सहयोग के कारण ही उनकी स्थिति मजबूत हुई है. ऐसे में फिलहाल इस मामले में हाशिये पर पड़े अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद अमेरिका के साथ ये तीनों शक्तियां सीरिया के भविष्य को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी.

दिसंबर में रूस, ईरान और तुर्की ने मास्को में एक बैठक की थी जिसमें कोई सीरियाई प्रतिनिधि नहीं था. ऐसे में इस संकट का घरेलू समाधान होने की जगह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक पैंतरे की संभावना पूरी है. असद ने भी कहा है कि रूस और अमेरिका के संबंधों में नरमी आने से सीरिया संकट को सुलझाने में मदद मिलेगी. उधर विद्रोहियों के पक्षधर तुर्की के साथ भी रूस के संबंध सामान्य होने लगे हैं. जानकारों का कहना है कि सीरिया का इस्तेमाल भू-राजनीतिक मंच पर बड़ी वैश्विक और क्षेत्रीय ताकतों की आपसी लेन-देन के लिए हो सकता है. तुर्की की स्थिति भी बहुत दिलचस्प है. उसने शुरू से ही विद्रोहियों की मदद की है. लेकिन सीरियाई कुर्द सैनिकों के बढ़ते प्रभाव ने राष्ट्रपति एर्दोआं को यह समझने के लिए मजबूर कर दिया कि कुर्द राष्ट्रपति असद से ज्यादा बड़ा खतरा हैं. कुर्द लड़ाके न तो असद की सुनते हैं और न ही विद्रोहियों की. तुर्की सरकार की नजर में सीरियाई कुर्द अपने देश में बढ़ते कुर्द उग्रवाद से जुड़े हुए हैं. इसलामिक स्टेट से लड़ने के लिए पांच हजार तुर्की सैनिक सीरिया के भीतर हैं और शांति वार्ता में भागीदारी से उसे अपना प्रभाव बढ़ाने में मदद मिल सकती है. 

संयुक्त राष्ट्र भी आठ फरवरी को सीरियाई सरकार और विद्रोहियों के बीच ठप पड़े जेनेवा वार्ता प्रक्रिया को शुरू करने जा रहा है. यूरोपीय देश सीरिया संकट में अलग-थलग पड़े हुए हैं. उनकी आंतरिक मुश्किलों और अमेरिकी नीतियों में अस्थिर725px-syria2c_administrative_divisions_-_nmbrs_-_colored-svgता के कारण अभी वे हस्तक्षेप करने की स्थिति में भी नहीं हैं. लेकिन मध्य-पूर्व में ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के राजनीतिक और आर्थिक हितों की जड़ें बहुत गहरी हैं तथा विभिन्न देशों के साथ उनके संबंध भी अच्छे हैं. ईरान की ताकत बढ़ने और सऊदी अरब की तीखी प्रतिक्रिया तथा यमन और लीबिया की अशांति के मद्देनजर बहुत जल्दी हम यूरोपीय देशों की उल्लेखनीय उपस्थिति देख सकते हैं.

बहरहाल, इतना जरूर है कि पांच सालों से अधिक समय से चल रहे सीरियाई गृह युद्ध के सिलसिले में आगामी दिनों में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं. पर, स्थायी शांति की अभी कोई गारंटी नहीं दी सकती है. लेबनान का सशस्त्र गुट हिजबुल्ला भी सीरिया में है. इसे ईरान और बशर अल-असद का समर्थन भी है. यमन में भी ईरान हौदी विद्रोहियों का समर्थन कर रहा है जिनके विरुद्ध सऊदी अरब का बड़ा गंठबंधन लड़ रहा है. रूस के प्रभाव के प्रति अमेरिका और यूरोप के नकारात्मक रवैये में भी बहुत जल्दी कोई अंतर नहीं आनेवाला है. फिर इसलामिक स्टेट और अल-कायदा से जुड़े गिरोहों की सक्रियता शांति वार्ताओं के परिणामों पर निर्भर नहीं करती है. अगर शांति बहाल भी होती है, तो यह कह पाना बहुत मुश्किल है कि यह कितनों दिनों तक रह पायेगी. लेकिन ऐसी कोशिशों से अगर लाखों शरणार्थियों की वापसी होती है तथा युद्ध से तबाह सीरिया के पुनर्निर्माण का रास्ता खुलता है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए. थोड़े समय की शांति बड़ी ताकतों, सीरियाई सरकार और विद्रोहियों को कुछ सकारात्मक सोच बनाने का अवसर भी दे सकती है.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this:
close-alt close collapse comment ellipsis expand gallery heart lock menu next pinned previous reply search share star